हिमाचल में इस पारंपरिक फसल ने बदली किस्मत, 4 जिलों के किसानों ने अब तक कमाए कमाए करोड़

हिमाचल में इस पारंपरिक फसल ने बदली किस्मत, 4 जिलों के किसानों ने अब तक कमाए कमाए करोड़

ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)

हिमाचल प्रदेश जहां सेब, आलू और बागवानी की फसलें अक्सर किसानों की पहचान मानी जाती हैं. वहीं, अब एक पारंपरिक फसल ने चुपचाप ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है. सदियों से खेतों में बोई जाने वाली गेहूं की फसल अब किसानों के लिए सिर्फ घरेलू जरूरत भर नहीं, बल्कि मजबूत आय का जरिया बनती जा रही है. खासकर कांगड़ा, सिरमौर, ऊना और सोलन जैसे जिलों में किसानों ने इस बार गेहूं की बेहतर पैदावार और सरकारी खरीद व्यवस्था का भरपूर लाभ उठाया है.

सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं की बंपर खरीद!

सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों की बढ़ती आवाजाही इस बात का संकेत है कि गेहूं अब नकदी फसल के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है. अब तक सरकार 102 किसानों के खाते में 1.28 करोड़ रुपए की राशि डाल चुकी है, जो प्रदेश के कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है. खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा 15 जून तक 3 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया गया है और खरीद प्रक्रिया अभी जारी है. ऐसे में आने वाले करीब दो महीनों में यह आंकड़ा कई करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है. इस तरह से गेहूं की यह सुनहरी फसल अब खेतों के साथ किसानों के सपनों और आर्थिक मजबूती में भी लहलहाने लगी है.

खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक प्रदीप ठाकुर का कहना है कि, “आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ेगा, क्योंकि अभी कई क्षेत्रों में फसल कटाई का कार्य जारी है. जैसे-जैसे गेहूं मंडियों तक पहुंचेगा, खरीद की रफ्तार भी तेज होगी. सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ा जाए और उन्हें उनकी मेहनत का उचित लाभ मिल सके. किसानों से अपील है कि वे अधिक से अधिक संख्या मार्केट फसल बेचकर सरकार की योजना का लाभ लाभ उठाएं. प्रदेश सरकार पिछले साल की तुलना में किसानों से 160 रुपए प्रति क्विंटल अधिक दाम पर गेहूं खरीद रही है.”

 

पिछली साल की तुलना में अधिक मुनाफा

सोने सी दमकती गेहूं की बालियों ने इस बार हिमाचल के किसानों के चेहरों पर भी खुशियों की चमक बढ़ा दी है. खेतों से मंडियों तक पहुंची फसल अब पहले से ज्यादा मुनाफा दे रही है, जिससे किसानों के चेहरों पर भी संतोष और उम्मीद की चमक दिखाई दे रही है. पिछले वर्ष की तुलना में इस बार गेहूं बेचने पर किसानों को अधिक आमदनी हो रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. प्रदेश सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जो बीते साल के मुकाबले 160 रुपए प्रति क्विंटल अधिक है. पिछले वर्ष किसानों से 2425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा गया था. ऐसे में इस बार बढ़े हुए समर्थन मूल्य से किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर दाम मिलेगा और खेती के प्रति उनका भरोसा भी और मजबूत होगा.

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